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Overviewयुगीन भावधारा में विंध्य के साहित्यकार जुड़कर लेखनी के कृतित्व को सार्थकता प्रदान करते हुए, अपनी सर्जना शक्ति को आलोकित करते हुए,मां भारती के चरणों में द्वितीय कृति विंध्य के कलमकार भाग 2 को निवेदित करने में सफल हुए हैं । इसके पूर्व में विंध्य के कलमकार भाग एक (साझा काव्य संकलन) प्रकाशित होकर लोक साहित्य के गौरव को स्तुत्य एवं वंदनीय बनाने में सफल रहा है । विंध्य के धरोहर के रूप में ""विंध्य के कलमकार भाग दो"" साझा काव्य संकलन में कुल 38 कवियों ने अपनी प्रधान रचनाओं में पांच पांच रचनाएं देकर पुस्तक को सार्थक बनाने में अपनी सहभागिता दी है। विंध्य की माटी का सुवास सुरभित होकर यहां की आरण्यक उपत्यकाओं,श्रृंग,गहवर,वनांचल,गुफाओं, द्वीपों,निर्झरों, झीलों,नदियों, बंजरों, जंगलों और पहाड़ों में विसरित होकर विंध्य के गीतकारों के लिए विंध्याटवी का आयाम प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे दुर्गम वनांचल में रहने वाले साहित्यकार विंध्य की गोद में पलते हुए अपनी कलम धर्मिता को सार्थकता प्रदान करते हुए, अपनी दूसरी अनुपमेय रचना ""विंध्य के कलमकार भाग 2"" साझा काव्य संकलन प्रस्तुत किया है। इन सभी रचनाकारों और उनकी रचनाओं को सजाने,संवारने सहेजने और लिपिबद्ध करने तथा सुदूर वनांचल से मगाने का दुरूह कार्य संपादक डॉo कमलापति गौतम कमल का है। Full Product DetailsAuthor: Dr Kamla Pati GautamPublisher: Anjuman Prakashan. Imprint: Anjuman Prakashan. ISBN: 9788119562299ISBN 10: 8119562291 Pages: 266 Publication Date: 30 April 2025 Audience: General/trade , General Format: Paperback Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor InformationTab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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