Poetry collection 146 (Edition1)

Author:   डॉ0 पंक पालीवाल
Publisher:   Libresco Feeds Private Limited
ISBN:  

9789375272878


Pages:   36
Publication Date:   08 November 2025
Format:   Paperback
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Poetry collection 146 (Edition1)


Overview

मन की पंखुड़ियां एक ऐसा कविता-संग्रह है, जहाँ भावनाएँ फूलों की तरह धीरे-धीरे खुलती हैं। यह कृति मन के उन सूक्ष्म स्पंदनों को स्वर देती है, जो अक्सर शब्दों से दूर रह जाते हैं। इस संग्रह की प्रत्येक कविता जीवन के किसी न किसी रंग को छूती है - प्रेम,विरह,आशा,आत्मसंवाद,स्मृतियाँ और भीतर की अनकही पीड़ा। यहाँ संवेदनाएँ बोझ नहीं बनतीं,बल्कि आत्मा को हल्का करती हैं। डॉ. पंकज पालीवाल की लेखनी में एक आत्मीय सरलता है। वे जटिल भावों को सहज शब्दों में पिरोते हैं, जिससे पाठक स्वयं को इन कविताओं में कहीं न कहीं पा लेता है। मन की पंखुड़ियां केवल पढ़ी नहीं जातीं - महसूस की जाती हैं। यह संग्रह उन सभी के लिए है, जो अपने भीतर की आवाज़ सुनना चाहते हैं और जीवन की भागदौड़ में कुछ क्षण ठहरकर मन से मिलना चाहते हैं।

Full Product Details

Author:   डॉ0 पंक पालीवाल
Publisher:   Libresco Feeds Private Limited
Imprint:   Libresco Feeds Private Limited
ISBN:  

9789375272878


ISBN 10:   9375272877
Pages:   36
Publication Date:   08 November 2025
Audience:   General/trade ,  General
Format:   Paperback
Publisher's Status:   Active
Availability:   Available To Order   Availability explained
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मन की पंखुड़ियां एक ऐसा कविता-संग्रह है, जहाँ भावनाएँ फूलों की तरह धीरे-धीरे खुलती हैं। यह कृति मन के उन सूक्ष्म स्पंदनों को स्वर देती है, जो अक्सर शब्दों से दूर रह जाते हैं। इस संग्रह की प्रत्येक कविता जीवन के किसी न किसी रंग को छूती है - प्रेम,विरह,आशा,आत्मसंवाद,स्मृतियाँ और भीतर की अनकही पीड़ा। यहाँ संवेदनाएँ बोझ नहीं बनतीं,बल्कि आत्मा को हल्का करती हैं। डॉ. पंकज पालीवाल की लेखनी में एक आत्मीय सरलता है। वे जटिल भावों को सहज शब्दों में पिरोते हैं, जिससे पाठक स्वयं को इन कविताओं में कहीं न कहीं पा लेता है। मन की पंखुड़ियां केवल पढ़ी नहीं जातीं - महसूस की जाती हैं। यह संग्रह उन सभी के लिए है, जो अपने भीतर की आवाज़ सुनना चाहते हैं और जीवन की भागदौड़ में कुछ क्षण ठहरकर मन से मिलना चाहते हैं।

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