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Overviewडॉ. रामसमुझ मिश्र 'अकेला' जी भाव और संवेदना के समन्वित काव्य की साधना के कवि हैं। न वे भावों में बह जाने की आतुरता दिखाते न ही संवेदनहीन होने की विमुखता ही। ये तटस्थता के भी पक्षधर नहीं हैं। भाव, जहाँ उन्हें अपनी संस्कृति, अपनी माटी, अपने गाँव-गिराँव से जोड़ने के साथ-साथ मानव-जाति के शाश्वत गुणों से जोड़ते हैं, वहीं संवेदनाएँ इन्हें राष्ट्रबोध, देशप्रेम, राजनीतिक चेतना तथा युगबोध से सम्बद्ध करती है। अकेला जी धनुष की तनी हुई प्रत्यंचा के समान कवि हैं। ये कब, कहाँ और किस पर चल जायें, कोई भरोसा नहीं। इतना अवश्य कहा जा सकता है कि इनके तरकश का प्रत्येक तीर मंगल-कामना से युक्त है, सभी के हित का पक्षधर है। 'मु]ट्ठी भर राख' काव्य-संग्रह में विविध भावभूमि की रचनाएँ हैं, लेकिन संग्रह का शीर्षक कवि की अन्तरतम हृदय-भूमि का सन्देश है। यह सन्देश प्रत्येक रचना में अन्तर्निहित है- भगवत-भक्ति से लेकर राष्ट्र-भक्ति तक। 'मु]ट्ठी भर राख' अकेला जी के भाव-जगत का अद्यतन प्रतिबिम्बन हैं। जिस कवि के हृदय में संसार की प्रत्येक वस्तु के प्रति यह भाव हो कि एक दिन उस वस्तु को 'मुट्ठी भर राख' में परिवर्तित हो जाना है, उस कवि की प्रत्येक कविता अपने ऊपरी अर्थ के साथ-साथ कई आन्तरिक अर्थों को भी ध्वनित करती है। आवश्यकता इस बात की है कि हम ध्यान देकर उस ध्वनि को सुन पायें। यह काव्य-संग्रह अकेला जी की काव्य-यात्रा का विकास भी है और अहम पड़ाव भी। निश्चित रूप ये संग्रह हिन्दी-साहित्य के पाठकों और अध्येयताओं को इनके पिछले काव्य-संग्रहों की तरह विस्मित और समृद्ध करेगा। Full Product DetailsAuthor: Dr Ram Samujh Mishra 'Akela'Publisher: Anjuman Prakashan. Imprint: Anjuman Prakashan. ISBN: 9788119562763ISBN 10: 8119562763 Pages: 128 Publication Date: 30 April 2025 Audience: General/trade , General Format: Paperback Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor InformationTab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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