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Overview'जागृत 'आत्मा' मेरे अवचेतन मन की कविताओं का एक संग्रह है, जो सर्वशक्तिमान ईश्वर - 'आत्मा' की सत्ता का मानवीकरण करती हैं। ये कुछ शब्द, मैंने उस अदृश्य आत्मा की सरसराहट सुनकर लिखे हैं जो कह रही थी - 'तुम्हारा वर्तमान फूलों की मधुर सुगंध से आनंदमय हो; तुम्हारा भविष्य प्रेम के स्वाद से प्रबुद्ध हो और ब्रह्मांड को दिव्य बना दे।' जब मैंने इन शब्दों में गहराई से झाँका, तो उन्होंने मेरे अवचेतन मन को छुआ और मुझे बताया कि ये परम प्रेम के लिए आपकी तड़प हैं। ये कविताएँ सिर्फ कुछ शब्द नहीं हैं, न ही बीते दिनों की पुकार, और न ही मेरे बेबस भाव; ये तीर्थयात्रा की ओर एक यात्रा हैं। 'प्रेम तितली की तरह प्रफुल्लित है'। जब मेरे अवचेतन विचार जागृत हुए, तो मैंने अपने प्रेम को अपनी ही खुशी में नाचते हुए पाया। 'इस पुस्तक में वर्णित मेरी इच्छाएँ और भावनाएँ किसी व्यर्थ कारण के लिए नहीं हैं, न ही यह बेकार के संचय के लिए है। एक दिन यह मेरे नेत्रों के सामने क्षितिज लाएगा।' ये कविताएँ मौन, संयम और सांत्वना में मेरे परम प्रेम की व्याख्या हैं। मृत्यु प्रेम को रहस्यमय नहीं बना सकती। यह पुस्तक संक्षेप में कहती है कि प्रेम जीवन की अमरता है, बाकी सब व्यर्थ है। प्रेम के बिना सारा ज्ञान अस्पष्ट रहता है। Full Product DetailsAuthor: Dr Dillip Kumar DashPublisher: Ukiyoto Publishing Imprint: Ukiyoto Publishing Dimensions: Width: 12.70cm , Height: 0.60cm , Length: 20.30cm Weight: 0.109kg ISBN: 9789377529338ISBN 10: 9377529336 Pages: 100 Publication Date: 15 April 2026 Audience: General/trade , General Format: Paperback Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor InformationTab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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