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Overviewमोहन राकेश ने अपनी रचनाओं में साहित्य की सभी पूर्व स्थापनाओं के हस्तक्षेप किया है। वे नई स्थापनाओं के लिए न तो कोई आग्रह करते हैं और न ही प्रतिज्ञा बँधते हैं। मानव मन, स्थितियाँ और उसके द्वंद्व की जटिलता व गहन-सघन संवेदना उनके पात्रों की दृष्टि में रहती है। आत्म-पूर्ण कलात्मक सहजता उनके लेखन की आधार रेखा प्रतीत होती है। यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि उनके द्वारा उद्धृत चिंतन उनके समय के समूचे साहित्य का उत्तर है। यदि आज उनके साहित्य-मूल्य को समझना चाहें तो उनके पत्रों से संवाद करना ज़रूरी-अनिवार्य है। ज्वालामुखी लेखन के संदर्भ में देखना महत्त्वपूर्ण है। विदुषी लक्ष्मी शर्मा की यह पुस्तक उसी यात्रा पर ले जाती है, जो अभी तक अवलोकित नहीं की गई। ऐसे स्थानों को खोलती है, जिनका अध्ययन लेखक की कृतियों में दृष्टिगत न होकर पत्रों में परिलक्षित होता है। ऐसा लगता है कि स्वयं मोहन राकेश ने अपनी कृतियों को समझने के लिए इस पुस्तक को प्रतिनिधि करने का दायित्व सौंपा है। Full Product DetailsAuthor: Laxmi SharmaPublisher: True Sign Publishing House Private Limited Imprint: True Sign Publishing House Private Limited ISBN: 9789372013726ISBN 10: 9372013722 Pages: 202 Publication Date: 13 August 2025 Audience: General/trade , General Format: Paperback Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor InformationTab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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