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Overviewइसी अवधि में जब सुरेश किसी प्रांत के एक बड़े शहर में रह रहे थे, एला उनके घर आई। उसके रूप, गुण और विद्या ने काका के मन में गर्व जगा दिया। वे अपने ऊपर वालों, साथियों तथा देशी-विलायती मिलने वालों एवं परिचितों के सामने अनेक बहानों से एला को प्रकट करने के लिए बेचैन हो उठे। एला की स्त्री-बुद्धि को यह समझते देर न लगी कि इसका फल अच्छा नहीं होगा। माधवी झूठे आराम का बहाना करके बार-बार कहने लगीं, ""मेरी जान बची। विलायती समाज परंपरा का बोझ मुझ पर क्यों लादना बेकार ही। मुझमें उसके लिए न विद्या है, न बुद्धि।"" यह रंग-ढंग देख एला ने अपने चारों ओर एक ज़नान-ख़ाना-सा खड़ा कर लिया। उसने बड़े उत्साह से सुरेश की लड़की सुरमा को पढ़ाने का भार अपने ऊपर ले लिया और शेष समय को अपने एक 'थीसिस' लिखने में लगाया, जिसका विषय था, 'बांग्ला मंगल-काव्य और चॉसर के काव्य की तुलना', इस बात को लेकर सुरेश भी बड़े उत्साहित हुए और इस समाचार को उन्होंने चारों ओर फैला दिया। माधवी ने मुँह बिचकाकर कहा, ""ज़्यादा शेखी अच्छी नहीं।"" Full Product DetailsAuthor: Rabindranath TagorePublisher: Prabhakar Prakashan Private Limited Imprint: Prabhakar Prakashan Private Limited ISBN: 9789367933510ISBN 10: 9367933517 Pages: 158 Publication Date: 23 June 2025 Audience: General/trade , General Format: Hardback Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor InformationTab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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