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Overviewकुछ चीज़ें अचानक नहीं खोतीं, बल्कि वे धीरे-धीरे हाथ से फिसलती हैं। यादें, रिश्ते, चेहरे, और फिर कभी-कभी खुद आप भी। 'जो बचा, वही' स्मृति के मिटने की नहीं, बल्कि स्मृति के भरोसे के टूटने की कहानी है। यह उस आदमी का वृत्तांत है जो बीमार नहीं है, पर ठीक भी नहीं है। जो जी रहा है, पर हर दिन थोड़ा कम मौजूद होता जा रहा है। जिसके भीतर यादें अभी हैं, पर वे बुलाने पर नहीं आतीं। जो चेहरों को पहचानता है, पर उनसे जुड़ी गर्मी नहीं पकड़ पाता। यह उपन्यास भूलने के डर से ज़्यादा उस खालीपन की कथा है जो तब पैदा होता है जब आदमी अपने ही अनुभवों से दूरी महसूस करने लगे। यहाँ प्रेम है, पर स्थिर नहीं। रिश्ते हैं, पर आश्वस्त नहीं। दिन हैं, पर उनके बीच कोई साफ़ सीमा नहीं बची। और लिखना है, पर रचना के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि अगर शब्दों में दर्ज न किया गया तो शायद कुछ भी भीतर टिकेगा नहीं। यह किताब किसी समाधान की ओर नहीं जाती। यह किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुँचती। यह बस ठहरती है, लौटती है, भटकती है, और उसी भटकाव में यह पूछती है कि जब स्मृति भरोसेमंद न रहे, तब आदमी अपनी पहचान कहाँ रखता है। 'जो बचा, वही' उन पाठकों के लिए है जो कहानी में घटना नहीं, अनुभव खोजते हैं। जो तेज़ उत्तर नहीं, बल्कि धीमे सवाल पढ़ना चाहते हैं। यह उपन्यास नहीं, बल्कि उस क्षण का दस्तावेज़ है जब आदमी यह समझने लगता है कि सब कुछ नहीं बच सकता, और फिर भी जीना जारी रखना पड़ता है। Full Product DetailsAuthor: सम्राट सिंहPublisher: Samraat Singh Imprint: Samraat Singh Dimensions: Width: 14.00cm , Height: 1.90cm , Length: 21.60cm Weight: 0.386kg ISBN: 9788199611566ISBN 10: 8199611561 Pages: 334 Publication Date: 13 February 2026 Audience: General/trade , General Format: Paperback Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor InformationTab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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