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Overviewजब अपने भीतर भावनाओं का एक तीव्र प्रवाह उठता है तो शब्दों के जालों में से उनकी तीव्रता को कम करते हुए कविता प्रकट होती है। कविता लिखना ऐसा जैसे महादेव का माँ गंगा के तीव्र प्रवाह को अपनी जटाओं में समा के उनकी क्षमता और सम्भावना को एक उचित दिशा देना। तो बस इस चाँद की चौंतीस परछाईयों के प्रथम अध्याय में ऐसी ही ३४ कवितायेँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। कविताओं के चयन में प्रयास किया है कि विविध विषयों को समाहित किया जाए। यदि आपको अच्छी लगी तो बाकी परछाईयाँ भी टुकड़ों टुकड़ों में आपके सामने रक्खी जाएँगी। Full Product DetailsAuthor: रक्तबीजPublisher: Bookleaf Publishing Imprint: Bookleaf Publishing Dimensions: Width: 12.70cm , Height: 0.30cm , Length: 20.30cm Weight: 0.068kg ISBN: 9789370926844ISBN 10: 9370926844 Pages: 58 Publication Date: 01 April 2025 Audience: General/trade , General Format: Book Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor Informationपिछले जन्म में लिखना शुरू तो मजबूरी में किया था लेकिन इस जन्म में जन्म में मजा आने लगा है सो लिखें जा रहे हैं। रक्तबीज अब तक कोई १००० कवितायेँ और १० लघु कथाएं लिख चुके हैं। कविताओं की ये पहली खेप हैI लेखन के अतिरिक्त रक्तबीज को पंचायत का बहुत शौक हैं और अक्सर किसी टपरी में चाय पर ज्ञान देते हुए दिख जाते हैं। आजीविका के लिए IIT मुंबई से PhD करके दर दर भटकने के बाद आज कल जल संसाधनों /नदियों के समुचित संरक्षण और एकीकृत प्रबंधन के लिए दिल्ली में कार्यरत हैं। Tab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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