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Overviewइस संग्रह की कविताएँ किसी दर्पण की तरह हैं, जिसमें पाठक स्वयं को भी देख सकते हैं और उस स्त्री को भी, जो कभी माँ है, कभी प्रेमिका, कभी बेटी, कभी अकेली सख़्त चट्टान-सी, तो कभी भीतर ही भीतर बहती एक नदी। ये कविताएँ ना तो शोर करती हैं, ना उपदेश - ये बस धीरे से पाठक के कंधे पर हाथ रखती हैं और कहती हैं, ""मैं भी यहीं हूँ - तुम्हारी तरह सोचती, सहती, सँभलती और फिर मुस्कुराती हूँ।"" रेनू 'अंशुल' की लेखनी में शब्दों की आत्मा है। वे जीवन के आम पलों को असाधारण संवेदना के साथ रचती हैं - कहीं प्रेम की सोंधी गंध है, तो कहीं समाज की कठोर साँसें। रिश्तों की उलझनों में सुलझती आत्मा, और खामोशी में बोलती स्त्री - इस संग्रह की केंद्रीय संवेदना है। Full Product DetailsAuthor: Renu 'Anshul'Publisher: Libresco Feeds Private Limited Imprint: Libresco Feeds Private Limited Dimensions: Width: 12.70cm , Height: 0.40cm , Length: 20.30cm Weight: 0.082kg ISBN: 9789371565127ISBN 10: 9371565128 Pages: 72 Publication Date: 01 June 2025 Audience: General/trade , General Format: Book Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor Informationरेनू 'अंशुल' हिंदी साहित्य की उन सशक्त हस्ताक्षरों में से एक हैं, जिन्होंने विविध विधाओं में अपनी लेखनी की मौलिक पहचान बनाई है। आकाशवाणी रामपुर से इनकी कहानियों, कविताओं, वार्ताओं, स्वरचित नाटकों और झलकियों का निरंतर प्रसारण होता रहता है। इनकी रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होती रही हैं। विविध सांस्कृतिक मंचों से लेखिका की प्रस्तुति न केवल साहित्यिक गरिमा से भरपूर होती है, बल्कि सामाजिक सरोकारों को भी गहराई से छूती है। अब तक इनकी छः पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं - तीन कहानी संग्रह, एक कविता संग्रह, और दो उपन्यास। यह साहित्यिक यात्रा निश्चित ही इनके अनुभव, संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। Tab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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