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Overviewस्वीकृति, संयम और सहजता - जब विचार इन तीनों से अलंकृत होते हैं, तभी कविता जन्म लेती है। 'अनकही' मेरे अंतर्मन की वही ध्वनि है, जो शायद हर युवा के भीतर गूंजती किसी अनकही कहानी से जुड़ती है। इस संकलन की हर कविता एक संवाद है - कभी प्रश्न करती हुई, तो कभी उत्तर देती हुई। यह केवल पंक्तियाँ नहीं, बल्कि आत्म-खोज की ओर एक विनम्र निमंत्रण हैं। जैसे हमारे विचारों का क्रम निश्चित नहीं होता, वैसे ही इस संग्रह में भी कविताओं का कोई निश्चित क्रम नहीं है। हर कविता को उसी स्वतः प्रवाह में पढ़ें, जिस भाव में वह आपके सामने आए। मेरा पाठकों से आग्रह है इन कविताओं को सिर्फ पढ़ें नहीं - इनके साथ बैठें, ठहरें, महसूस करें... और शायद, इनमें अपनी 'अनकही' को ढूँढ पाएँ। Full Product DetailsAuthor: निर् वासणवालाPublisher: Bookleaf Publishing Imprint: Bookleaf Publishing Dimensions: Width: 12.70cm , Height: 0.20cm , Length: 20.30cm Weight: 0.045kg ISBN: 9789370926516ISBN 10: 9370926518 Pages: 38 Publication Date: 01 April 2025 Audience: General/trade , General Format: Book Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviewsAuthor Informationमेरे सभी सह-अतिविचारकों को प्रणाम, और यदि आप अतिविचारक नहीं हैं - तो आपको भी स्नेहपूर्वक वंदन। मैं हूँ निर्जरा वासणवाला। जितने गहरे मेरे संवाद हैं, मैं उतनी ही मनमौजी भी हूँ। मैं मानती हूँ कि स्वभाव में संतुलन आवश्यक है, और वह संतुलन पाने के लिए हमें मन की गहराइयों में उतरना होता है। यह पुस्तक उस अंतर्यात्रा की कवितात्मक अभिव्यक्ति है।तो आइए, मेरे साथ मन की गहराइयों की इस यात्रा पर चलें। Tab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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