शहरग़र्द - शहर की ग़र्द से (Edition1st)

Author:   Tarun Sharma
Publisher:   Libresco Feeds Private Limited
ISBN:  

9789372135527


Pages:   38
Publication Date:   01 July 2025
Format:   Book
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शहरग़र्द - शहर की ग़र्द से  (Edition1st)


Overview

इस काव्य-संग्रह ""शहरगर्द -शहर की गर्द से"" की जड़ें, मेरे जीवन के उस ग़र्द भरे रस्ते में हैं, जिसे हम अक्सर 'छोटे शहरों की ज़िंदगी' कहते हैं। यह संग्रह, न सिर्फ़ कविताओं का संकलन है, बल्कि छोटे और बड़े शहरों में बिताए मेरे जीवन की उन अनुभूतियों, संघर्षों, तुलनाओं, बदलावों और सूक्ष्म परतों का दस्तावेज़ है जिन्हें मैंने जिया है, समझा है और शब्दों में ढालने की कोशिश की है। यह संग्रह असल में छोटे शहरों, उनके अनूठेपन, और उनमें में हो रहे बदलावों पर एक टिप्पणी है और शहरी परिवर्तन, आधुनीकरण और छोटे शहरों की विशिष्ट पहचान को दर्शाने का एक प्रयास है।

Full Product Details

Author:   Tarun Sharma
Publisher:   Libresco Feeds Private Limited
Imprint:   Libresco Feeds Private Limited
ISBN:  

9789372135527


ISBN 10:   9372135526
Pages:   38
Publication Date:   01 July 2025
Audience:   General/trade ,  General
Format:   Book
Publisher's Status:   Active
Availability:   Available To Order   Availability explained
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Table of Contents

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Author Information

तरुण शर्मा ऋषिकेश शहर में पले-बढ़े लेखक हैं, जिन्होंने बड़े और छोटे शहरों की हलचल को बहुत करीब से जिया है। """"शहरगर्द"""" उनके लिए सिर्फ़ उपनाम नहीं, बल्कि वह नज़रिया है जिससे वे शहरों की धूल में छुपे जज़्बातों को देखना और समझना चाहते हैं। बचपन में भरे-पूरे परिवार में रहते हुए और फिर दिल्ली, सिंगापुर, बैंगलोर जैसे शहरों में पढ़ाई और काम करते हुए तरुण ने ज़िंदगी के कई रंग देखे। पिछले दो दशकों से वे डायरी, ब्लॉग और लॉगबुक्स में अपने अनुभवों, ख्वाबों और सवालों को दर्ज करते रहे हैं।उनकी लेखनी में छोटे शहरों की खुशबू, बड़े शहरों की बेचैनी, और आत्ममंथन की तड़प साथ चलती है। """"शहरगर्द"""" के ज़रिए वे उन आवाज़ों को शब्दों में पिरोते हैं, जो अक्सर शहर की भीड़ में खो जाती हैं।

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