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Overviewपुनश्च राध स्वयं को अनुभूतियों की उन्मुक्तता की अनुमति देना है। राधा होना यहाँ कोई पौराणिक पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि एक आधुनिक स्त्री का आत्मबोध है-उसकी बाहर और भीतर की निरन्तर चलती यात्रा। इस यात्रा में वह मिलन की ऊष्मा में पिघलती है, वियोग के ताप से सँवरती है, और समय की चुनौतियों से निखरकर स्वयं से साक्षात्कार करती है। फिर इस राधा होने में कृष्ण कहाँ? कृष्ण कभी प्रेमी है, कभी मित्र, कभी सहयात्री, कभी मार्गदर्शक-और कभी कहीं नहीं। पुनश्च राध स्त्री मन की उन सूक्ष्म परतों को खोलता है जहाँ प्रेम, विरह, स्मृति और आत्मस्वीकृति एक साथ बहते हैं। यह काव्य कृति पाठक को एक ऐसी यात्रा पर ले जाती है जो कोमल है और गहन भी-बिल्कुल राधा होने की तरह। Full Product DetailsAuthor: BhargaviravuPublisher: Poeri Publishing Imprint: Poeri Publishing Dimensions: Width: 12.70cm , Height: 0.50cm , Length: 20.30cm Weight: 0.082kg ISBN: 9781919502601ISBN 10: 1919502602 Pages: 74 Publication Date: 27 May 2026 Audience: General/trade , General Format: Paperback Publisher's Status: Active Availability: Available To Order We have confirmation that this item is in stock with the supplier. It will be ordered in for you and dispatched immediately. Language: Hindi Table of ContentsReviews'पुनश्]च राध' आधुनिक बिम्बों में रची एक दीर्घ प्रेम-कविता है, जहाँ शब्द और स्वर-लहरियाँ पाँच तत्वों-सी एकाकार होकर साँसों की लय रचती हैं। ऋचा की 'कोडेड' संरचना में पराचेतना और चेतना का संगम, मृत्युबोध और प्रेम का समाहार, और राधा-भाव की सनातन धारा एक साथ स्पंदित होती है। - अनामिका, वरिष्ठ कवयित्री राधा प्रेम है, प्रेमाभिव्यक्ति है - ज़ीस्त की तहाें में बसी। कभी वह धुँधली पड़ जाती है तो कभी हम उसे भूल जाते हैं। पुनश्]च राध शायद आपके अंदर की राधा को ढूँढ लाए, आपको याद दिला जाए कि प्रेम में पगे आप कितने सुंदर थे ! - मनीष गुप्ता, 'हिंदी कविता' के संस्थापक और फ़िल्मकार राधा का प्रेम जैसे सुवासित फूल कृष्ण के हृदय में, ऐसी ये रस में डूबी कविताएँ सृष्टि में कमल नाल सी। - प्रत्यक्षा, वरिष्ठ कथाकार Author Informationऋचा जैन आई.टी. कन्सल्टन्ट के रूप में लंदन में कार्यरत हैं और समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय रचनाकार हैं। उनका प्रथम हिंदी कविता संग्रह 'जीवन वृत्त, व्यास ऋचाएँ' भारतीय उच्चायोग, लंदन द्वारा डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी अनुदान योजना 2018 के अंतर्गत सम्मानित और 2020 में ज्ञानपीठ से प्रकाशित हुआ। उनकी जर्मन भाषा में बच्चों की पुस्तक 'श्पास मिट एली उंड एज़ी' 2014 में गोयल पब्लिशर्स से प्रकाशित हुई, तथा उनकी काव्य-कृति 'पुनश्च राध' का अंतरराष्ट्रीय ऑडियो लोकार्पण 2025 में हुआ। वे लंदन में हिंदी ओपन माइक कविता कैफ़े यू.के. की सह संस्थापक, वातायनम् ऑनलाइन त्रैमासिक पत्रिका के विश्व साहित्य खण्ड की सम्पादक और वातायन यू.के. साहित्यिक संस्था की सचिव हैं। ऋचा हिंदी शिक्षण और डिजिटल सामग्री निर्माण में भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने 'खेल खेल में हिंदी' यूट्यूब चैनल के लिए बाल कविता वीडियो निर्माण में सहभागिता की है तथा पूर्व में बच्चों एवं वयस्कों को हिंदी तथा जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्रदान किया है। संपर्क richa287@yahoo.com Tab Content 6Author Website:Countries AvailableAll regions |
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